विगत कई दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। काशी विद्वत्परिसषद् के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि बीते सोमवार की शाम करीब छह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी आयु 92 वर्ष थी।
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| महामहोपाध्याय पद्मश्री प्रो. रामायतना शुक्ला |
वाराणसी। काशी विद्वत्परिषद् के अध्यक्ष महामहोपाध्याय पद्मश्री प्रोफेसर रामयत्न शुक्ल को बीती सोमवार की शाम को आईसीयू में भर्ती कराया गया था। विगत कई दिनों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। काशी विद्वत्परिसषद् के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि सोमवार शाम करीब छह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी आयु 92 वर्ष थी।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि व्याकरण शास्त्र के अति विशिष्ट विद्वान,काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. रामयत्न शुक्ल के आकस्मिक निधन की सूचना से हम सभी स्तब्ध और मर्माह्त हैं यह सूचना अत्यंत दुखद है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और संस्कृत के प्रकांड विद्वान प्रोफेसर रामयत्न शुक्ल को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। वह शक्ति पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती समेत कई संतों को विद्या दान कर चुके हैं।
नौ साल की आयु से कर रहे थे संस्कृत का प्रचार प्रसार
प्रोफेसर रामयत्न शुक्ल नौ वर्ष की आयु से संस्कृत के प्रचार-प्रसार से जुड़े थे।. वह संस्कृत की निशुल्क शिक्षा देते थे।. छात्रों की हर समस्या का वह समाधान करते थे। उनका जन्म सन् 1932 में हुआ था। बचपन से ही उनकी संस्कृत विषय में अधिक रुचि थी। उनके पिता राम निरंजन शुक्ल भी संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी व स्वामी चैतन्य भारती से वेदांत शास्त्र, हरिराम शुक्ल से मीमांसा और पंडित रामचन्द्र शास्त्री से दर्शन व योग शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी।
प्रो. शुक्ल बीएचयू संस्कृत विद्या धर्मविद्या संकाय में आचार्य रह चुके हैं । वह सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में भी व्याकरण विभाग के आचार्य व अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। मुख्य रूप से भदोही जनपद के कोनिया क्षेत्र के कलातुलसी गांव निवासी प्रो शुक्ल के पढ़ाए हुए कई छात्र कुलपति पद पर आसीन हैं। यही नहीं उन्होंने शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के साथ स्वामी गुरु शरणानंद, रामानंदाचार्य, स्वामी रामभद्राचार्य को भी विद्या का दान दिया है।
व्याकरण शास्त्र के उद्भट विद्वान पद्मश्री प्रो. रामयत्न शुक्ल प्रोफेसर राम यत्न शुक्ल ने 1961 में सन्यासी संस्कृत महाविद्यालय में बतौर प्राचार्य छात्रों को शिक्षा दी। वर्ष 1974 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नियुक्त हुए। सन् 1976 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अपनी सेवा दी। सन् 1982 में वह सेवानिवृत्त हो गए। अब वह काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष हैं। वह सनातन संस्कृति परिषद के संस्थापक भी हैं। उन्हें वर्ष 2015 में संस्कृत के शीर्ष सम्मान 'विश्वभारती' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
भारतीय संस्कृति तथा पारम्परिक शास्त्रों के संरक्षण में सम्पूर्ण जीवन लगाने वाले प्रो राम यत्न शुक्ल के निधन से काशी के विद्वत समाज में शोक की लहर है। भारत के अनेक धर्माचार्यो के शिक्षा गुरु तथा भारत ही नहीं विश्व में संस्कृत भाषा तथा पारम्परिक शास्त्रों के संरक्षण संवर्धन में योगदान देने वाले आचार्य के न रहने पर अपूर्णीय क्षति हुई। काशी विद्वतपरिषद् के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत परम्परा की कड़ी टूट गई। शहर दक्षिणी के विधायक व पूर्व मंत्री डा नीलकंठ तिवारी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्याकरण व काशी की विद्वत परम्परा की अपूरणीय क्षति है। सभी संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने शोक व्यक्त किया तथा देश भर के धर्माचार्यों तथा शंकराचार्यों ने भी शोक जताया है। पद्मभूषण वशिष्ठ त्रिपाठी, शिवशरण पाठक, भाजपा के महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय , क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चन्द्र श्रीवास्तव ने शोक जताया
पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जताया शोक
संस्कृत व्याकरण के प्रकांड विद्वान व काशी विद्वत परिषद के महामहोपाध्याय पद्मश्री प्रो.रामयत्न शुक्ल जी के निधन से पांडित्य परंपरा के एक युग का अंत हो गया। वह जीवनपर्यन्त संस्कृत के ज्ञान का प्रसार करने हेतु प्रयासरत रहे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शांति : अमित शाह, गृह मंत्री
