रायपुर। धमतरी से 14 किलोमीटर दूर गंगरेल किनारे सुरम्य वादियों में भाजपा के सांसदों, कुछ विधायकों और कोर ग्रुप के सदस्यों की गोपनीय बैठक आज आयोजित की गई है। सूत्रों के अनुसार इस गोपनीय बैठक में मिशन 2023 को लेकर चर्चा कर आगे की सियासी रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल भी मौजूद रहेंगे। इसमें हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश बुधवार शाम को रायपुर पहुंचे। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल दो दिन पहले ही पहुंच चुके हैं और लगातार पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मिल-जुल रहे हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ प्रभारी ओम माथुर के आने की अब तक कोई सूचना नहीं है। बैठक में डॉ. रमन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, कोर ग्रुप के सदस्य, तीनों प्रदेश महामंत्री और संभाग प्रभारी मिलाकर 30 सदस्य होंगे।
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| प्रतीकात्मक चित्र |
बैठक के बाद सभी शाम तक राजधानी और अपने अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो जाएंगे। इस बैठक में भाजपा आज, पार्टी आने वाले दिनों में कौन से आंदोलन करेगी, राज्य सरकार के खिलाफ किन मुद्दों को लोगों तक लेकर जाएगी आदि बातों पर चर्चा करेगी। बताया जा रहा है की बैठक में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था, बिलासपुर में शराबबंदी तथा सरगुजा में आदिवासियों से जुड़े मुद्दे पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। पीएम आवास योजना के हितग्राही जिन्हें अब तक एक भी क़िस्त नहीं मिली उसे लेकर भी आंदोलन किया जा सकता है। इन सभी कार्यक्रमों के लिए गंगरेल में ही समय व स्थान तय किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि संगठन के विभिन्न मोर्चा संगठनों के खराब परफारमेंस वाले पदाधिकारियों के बदलने पर भी चर्चा हो सकती है। राजनीतिक पंडित इस गोपनीय बैठक को इस नजर से भी देख रहे हैं, चूंकि अब चुनावी रणनीति बनाने के लिए ज्यादा समय बचा नहीं है।
भाजपा को प्रदेश में खाेए हुए जनाधार को वापस लाने के लिए जनता के बीच जाकर लगातार संपर्क में रहना होगा। इसलिए भाजपा गोपनीय बैठक में कुछ ऐसे एजेंडे पर चर्चा करेगी, जो उसके लिए 2023 के चुनाव में रामबाण साबित हो और ऐन वक्त पर उसे सियासी रंग देकर पाला अपने पक्ष में कर लें। गौरतलब है की राज्य में चुनाव के लिए अब सालभर का समय है। इसलिए अब भाजपा ताबड़तोड़ तरीके से आंदोलन प्रदर्शन करने की तैयारी में है, जिससे राज्य सरकार और कांग्रेस को संभलने का मौका न मिले और लोगों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक माहौल गरमाए।
इन आंदोलनों को पार्टी के बजाय जनता का आंदोलन बनाने की तैयारी है, जिससे व्यापक असर हो। पिछले दिनों सड़क की खराब स्थिति पर भाजपा के सोशल मीडिया कैंपेन का असर देखने को मिला। राज्य सरकार ने पीडब्ल्यूडी अफसरों को सड़कों की मरम्मत करने का आदेश दिया। पीडब्ल्यूडी सचिव को कलेक्टरों को निगरानी के लिए चिट्ठी जारी करनी पड़ी।
